आज हिंदी ब्लॉगिंग का एक बड़ा संसार है , काफी वृहद् और व्यापक स्वरुप धारण करती जा रही है । यह एक उम्मीद की किरण बनकर आई है, देशज शब्दों और क्षेत्रीय रंग से संवरी सुन्दर हिंदी को आयामित करने हेतु । माधुरी के पूर्व संपादक और कोशकार अरविन्द कुमार का मानना है कि ” किसी पर कोई व्यवसायिक दबाब नहीं है कि वह कटी-छनती भाषा लिखे । हर किसी के समझने के लिए हर ब्लॉग नहीं है जिसे समझना होगा, वह शब्कोष की मदद लेगा । मुझ पर हिंदी चिट्ठाकारिता का नशा इसलिए चढ़ा है कि लगभग रोज मेरे अन्दर सो चुके किसी न किसी शब्द को कोई हिलाकर जगा देता है ।” वहीँ हिंदी के वहुचर्चित ब्लॉगर रवि लतलामी कहते हैं कि ” किसी रचनाकार के लिए अपनी रचनाओं को इंटरनेट के जरिये बस्तर से लेकर न्यूआर्क तक चाहूं ओर सहज तरीके से पहुंचाने का इससे सुन्दर, सरल और सस्ता उपाय नहीं हो सकता ।”कुछ खट्टा – कुछ मीठा है,ब्लॉगजगत का हाल !
आओ सुनाएँ आपको ,कैसे बीता साल !!
कहीं राड़- तकरार था , कहीं प्यार – इजहार !
तोल-मोल में व्यस्त थे , हिन्दी -चिट्ठाकार !!
खूब लुटाये “ज्ञान” ने , ज्ञान का अक्षय कोष !
और “सारथी” ने किये , हिन्दी का जयघोष !!
कहीं हास व व्यंग्य है , कहीं तकनिकी ज्ञान !
ब्लॉगर के घर हो रहे , नित्य नया संधान !!
ब्लॉगजगत में “तश्तरी”बनकर के अपबाद !
घूम रहे हैं आजकल , भारत में निर्बाध !!”
“अलोक” ढूँढते रह गए , हिन्दी मापक यंत्र !!
कांव- कांव “काकेश “ के , कभी न माने हार !
नए शोध में व्यस्त हैं , अपने ” अमर कुमार “!!
अजब यहाँ संयोग है , शब्द- शब्द में प्यार !
“महावीर “ की साधना , “ममता” का श्रृंगार !!
“मीनाक्षी” ने मिला दिए , चिंतन में हीं भंग !!
मोती को खंगाल के , फेंक रहे हैं सीप !
बाँट रहे हैं रोशनी , ” दीपक भारतदीप “ !!
“रवि रतलामी “ने मियाँ , खूब जमाये रंग !
शब्द-शब्द साहित्य में , सम्मानों के संग !!
फिल्म समीक्षा कर-करके , व्यस्त हुए “दिव्याभ”!!
संवेदन – संसार में , हास बना हथियार !
लगा रहा ” ठहाका “है , मुम्बई वाला यार !!
गूँज रहा है “रेडियो” “ई-मिरची“ के संग !
“बाल किशन” का ब्लोग भी , खूब दिखाया रंग !!
“शब्द लेख” यह सारथी, और “संजय” उवाच !
“अंकुर गुप्ता” ढूंढ रहे, “हिन्दी पन्ना” आज !!
लाये विनोद “हसगुल्ले” “संजय” देखें जोग !
” आशीष महर्षि” बोले, बनाबा दो अब योग !!
दूर खड़े ही सोचते, रह-रहकर “उन्मुक्त “ !
“चक्रव्यूह “ के व्यूह से, कब होंगे हम मुक्त !!
आपण “सचिन लुधियानवी” ” कंचन सिंह चौहान“ !
एक धार में बह रहे , ” सुखन साज़ ” ” इरफान “ !!
कोलकत्ते में “मीत” क्यों , खोज रहे हैं मीत !
गजल हुयी है बेवफा , खंडित हो गए गीत !!
“अन्तरध्वनि “ में नीरज जी, ” महक “ बिखेरें आज !
छंद की गरिमा ढूंढें, ” वाचस्पति अविनाश “ !!
” अनुगुन्जन “ और ” इयता “ सुन्दर सा है ब्लोग !
संकृत्यायन कह रहे , मेरा है यह शौक !!
” नोटपैड “ पर लिखिये , जो जी में आ जाये !
या ” कबाड़ “ में फेंकिये , उल्टी- सीधी राय !!
” विनीत कुमार “ की गाहे, और बगाहे बात !
” जोशिम “ के संग गाईये , ग़ज़ल अगर हो याद !!
“पुनीत ओमर ” ” अर्बूदा ” , “अनिल “ कलम के साथ !
लिखें क्या अब ब्लॉग में, पीट रहे हैं माथ !!
“नारद” घूमे ब्लोग पे, चाहे जागे सोय !
नर हो या नारायण हो, चर्चा सबकी होय!!
मतलब वाली बतकही, करती है दिन-रात !
अपनी भी “परिकल्पना” हो गयी है कुख्यात !!
बडे ढोल म पोल बड़ी , यही मुकद्दस बात !
जिसका दिल जितना बड़ा , वही “चकल्लस ” गात !!
नीरव की यह “वाटिका “ देती है सन्देश !
अनवरत साहित्य बढे , प्रगति करे यह देश !!
“घुघूती बासूती” को, ” कथाकार” की राय !
उत्तरोत्तर सोपान पे , नया साल ले जाय !!
” आलोक पुराणिक “ बोले, ” नीरज ” जी को छोड़ !
चिट्ठा- चिट्ठा घूम के , लगा रहे हो होड़ !!
” अनूप शुक्ल “ श्रधेय हैं, करते नहीं” भदेस” !
सबको देते स्नेह से , शांति- सुख- सन्देश !!
अपना चिंतन बांचिये , देकर सबको प्यार !
सदीच्छा से भरा रहे, यह सुन्दर संसार !!
कुछ चिट्ठे नाराज हैं, अंकित नही है नाम !
खास-खास को छोड़ के , जोड़े हो क्यूं आम ? ?
भाई मेरे यह सोचो, कुछ तो हुआ कमाल !
पढा है जिसको मैंने , पूछा उसका हाल !!
बस इतनी सी बात है , ना समझे तो ठीक!
समझदार तो सबहीं हैं,समझ गए तो ठीक !!
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