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वार्षिक ब्लॉग विश्लेषण-२००७

आज हिंदी ब्लॉगिंग का एक बड़ा संसार है , काफी वृहद् और व्यापक स्वरुप धारण करती जा रही है । यह एक उम्मीद की किरण बनकर आई है, देशज शब्दों और क्षेत्रीय रंग से संवरी सुन्दर हिंदी को आयामित करने हेतु । माधुरी के पूर्व संपादक और कोशकार अरविन्द कुमार का मानना है कि ” किसी पर कोई व्यवसायिक दबाब नहीं है कि वह कटी-छनती भाषा लिखे । हर किसी के समझने के लिए हर ब्लॉग नहीं है जिसे समझना होगा, वह शब्कोष की मदद लेगा । मुझ पर हिंदी चिट्ठाकारिता का नशा इसलिए चढ़ा है कि लगभग रोज मेरे अन्दर सो चुके किसी न किसी शब्द को कोई हिलाकर जगा देता है ।” वहीँ हिंदी के वहुचर्चित ब्लॉगर रवि लतलामी कहते हैं कि ” किसी रचनाकार के लिए अपनी रचनाओं को इंटरनेट के जरिये बस्तर से लेकर न्यूआर्क तक चाहूं ओर सहज तरीके से पहुंचाने का इससे सुन्दर, सरल और सस्ता उपाय नहीं हो सकता ।”
२००७ में चिट्ठाजगत की गतिविधियों पर , हमारा यह काव्य विश्लेषण परिकल्पना पर पहली बार प्रकाशित हुआ था । यह पहल अनायास ही मेरे द्वारा की गयी । इस विश्लेषण के पीछे किसी भी प्रकार का पूर्वाग्रह अथवा दुराग्रह नही था ,बल्कि केवल मनोरंजन के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया था,किन्तु इस विश्लेषण को हिंदी ब्लॉगजगत ने काफी गंभीरता से लिया । फलत: वर्ष-२००८ और वर्ष-२००९ में मुझे वृहद् विश्लेषण के दौर से गुजरना पडा ….!
हिंदी ब्लॉगिंग की गतिविधियों को एक जगह सहेजते हुए दस्तावेज का रूप देने के उद्देश्य से मेरे द्वारा वर्ष-२००७ में पहली बार वार्षिक हिंदी ब्लॉग विश्लेषण परिकल्पना पर प्रस्तुत किया गया,जिसे स्मृति के रूप में आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है :
वार्षिक ब्लॉग विश्लेषण-२००७

कुछ खट्टा – कुछ मीठा है,ब्लॉगजगत का हाल !

आओ सुनाएँ आपको ,कैसे बीता साल !!

कहीं राड़- तकरार था , कहीं प्यार – इजहार !

तोल-मोल में व्यस्त थे , हिन्दी -चिट्ठाकार !!

खूब लुटाये “ज्ञान” ने , ज्ञान का अक्षय कोष !

और “सारथी” ने किये , हिन्दी का जयघोष !!

कहीं हास व व्यंग्य है , कहीं तकनिकी ज्ञान !

ब्लॉगर के घर हो रहे , नित्य नया संधान !!

ब्लॉगजगत में “तश्तरी”बनकर के अपबाद !

घूम रहे हैं आजकल , भारत में निर्बाध !!”

“चिट्ठा “ नए कलेवर में , यत्र-तत्र- सर्वत्र !

“अलोक” ढूँढते रह गए , हिन्दी मापक यंत्र !!

कांव- कांव “काकेश “ के , कभी न माने हार !

नए शोध में व्यस्त हैं , अपने अमर कुमार “!!

अजब यहाँ संयोग है , शब्द- शब्द में प्यार !

“महावीर “ की साधना , “ममता” का श्रृंगार !!

कहीं अनिता” दर्शन में , कहीं “साध्वी संग !

“मीनाक्षी” ने मिला दिए , चिंतन में हीं भंग !!

मोती को खंगाल के , फेंक रहे हैं सीप !

बाँट रहे हैं रोशनी , ” दीपक भारतदीप “ !!

“रवि रतलामी “ने मियाँ , खूब जमाये रंग !

शब्द-शब्द साहित्य में , सम्मानों के संग !!

“परमजीत” की जीत हुई , फिर से आये “राज”

फिल्म समीक्षा कर-करके , व्यस्त हुए “दिव्याभ”!!

संवेदन – संसार में , हास बना हथियार !

लगा रहा ” ठहाकाहै , मुम्बई वाला यार !!

गूँज रहा है रेडियो” “ई-मिरची के संग !

“बाल किशन” का ब्लोग भी , खूब दिखाया रंग !!

“शब्द लेख” यह सारथी, और “संजय” उवाच !
“अंकुर गुप्ता” ढूंढ रहे, “हिन्दी पन्ना” आज !!

“ठुमरी” गाकर मस्त है, खूब निपोरे खीश !
विमल बेचारे सोचे , कहाँ गए हैं “श्रीश” !!

लाये विनोद “हसगुल्ले” “संजय” देखें जोग !
” आशीष महर्षि” बोले, बनाबा दो अब योग !!

दूर खड़े ही सोचते, रह-रहकर “उन्मुक्त “ !
“चक्रव्यूह “ के व्यूह से, कब होंगे हम मुक्त !!

आपणसचिन लुधियानवी” ” कंचन सिंह चौहान !
एक धार में बह रहे , सुखन साज़ ” ” इरफान !!

कोलकत्ते में “मीत” क्यों , खोज रहे हैं मीत !
गजल हुयी है बेवफा , खंडित हो गए गीत !!

“अन्तरध्वनि “ में नीरज जी, ” महक “ बिखेरें आज !
छंद की गरिमा ढूंढें,
” वाचस्पति अविनाश “ !!

” अनुगुन्जन “ और ” इयता “ सुन्दर सा है ब्लोग !

संकृत्यायन कह रहे , मेरा है यह शौक !!

” नोटपैड “ पर लिखिये , जो जी में आ जाये !
या ” कबाड़ “ में फेंकिये , उल्टी- सीधी राय !!

” विनीत कुमार “ की गाहे, और बगाहे बात !
” जोशिम “ के संग गाईये , ग़ज़ल अगर हो याद !!

“पुनीत ओमर ” ” अर्बूदा ” , “अनिल कलम के साथ !
लिखें क्या अब ब्लॉग में, पीट रहे हैं माथ !!

“नारद” घूमे ब्लोग पे, चाहे जागे सोय !
नर हो या नारायण हो, चर्चा सबकी होय!!

मतलब वाली बतकही, करती है दिन-रात !
अपनी भी “परिकल्पना” हो गयी है कुख्यात !!

बडे ढोल म पोल बड़ी , यही मुकद्दस बात !

जिसका दिल जितना बड़ा , वही “चकल्लस ” गात !!

नीरव की यह “वाटिका “ देती है सन्देश !
अनवरत साहित्य बढे , प्रगति करे यह देश !!

“घुघूती बासूती” को, ” कथाकार” की राय !
उत्तरोत्तर सोपान पे , नया साल ले जाय !!

” आलोक पुराणिक “ बोले, ” नीरज ” जी को छोड़ !
चिट्ठा- चिट्ठा घूम के , लगा रहे हो होड़ !!

कुछ विनोद भी सुस्त है , निकल गया अरमान”
मंगलम “ कहते रहे, सबको दो सम्मान !!

” अनूप शुक्ल “ श्रधेय हैं, करते नहीं” भदेस” !

सबको देते स्नेह से , शांति- सुख- सन्देश !!

अपना चिंतन बांचिये , देकर सबको प्यार !
सदीच्छा से भरा रहे, यह सुन्दर संसार !!

कुछ चिट्ठे नाराज हैं, अंकित नही है नाम !
खास-खास को छोड़ के , जोड़े हो क्यूं आम ? ?

भाई मेरे यह सोचो, कुछ तो हुआ कमाल !
पढा है जिसको मैंने , पूछा उसका हाल !!

बस इतनी सी बात है , ना समझे तो ठीक!
समझदार तो सबहीं हैं,समझ गए तो ठीक !!

()रवीन्द्र प्रभात
मुख्य संपादक : परिकल्पना ब्लॉगोत्सव
My Photoलेखक परिचय:
हिंदी के मुख्य ब्लॉग विश्लेषक के रूप में चर्चित रवीन्द्र प्रभात विगत ढाई दशक से निरंतर साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखनरत हैं । इनकी रचनाएँ भारत तथा विदेश से प्रकाशित लगभग सभी प्रमुख हिन्दी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं तथा कविताएँ लगभग डेढ़ दर्जन चर्चित काव्य संकलनों में संकलित हैं। इन्होंने सभी साहित्यिक विधाओं में लेखन किया है परंतु व्यंग्य, कविता और ग़ज़ल लेखन में विशेष सक्रिय हैं। लखनऊ से प्रकाशित हिंदी “दैनिक जनसंदेश टाइम्स” के नियमित स्तंभकार, जिसमें व्यंग्य पर इनका साप्ताहिक स्तंभ “चौबे जी की चौपाल ” काफी लोकप्रिय है। “हमसफ़र” और “मत रोना रमजानी चाचा” दो ग़ज़ल संग्रह तथा एक कविता संग्रह “स्मृति शेष” प्रकाशित है । इन्होंने “समकालीन नेपाली साहित्य” में सक्रिय हस्ताक्षरों की रचनाओं का एक संकलन भी संपादित किया है । विगत चार वर्षों से हिंदी चिट्ठों का विहंगम विश्लेषण कर रहे रवीन्‍द्र को “संवाद सम्मान” से वर्ष-२००९ में सम्मानित किया गया। साहित्यिक संस्था “काव्य संगम” के प्रकाशन सचिव,”लख़नऊ ब्लॉगर एसोसिएशन” के अध्यक्ष तथा “प्रगतिशील बज्जिका लेखक संघ” के राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं । वर्त्तमान में ये अंतरजाल की बहुचर्चित ई-पत्रिका “हमारी वाणी” के सलाहकार संपादक तथा प्रमुख सांस्कृतिक संस्था “अन्तरंग” के राष्ट्रीय सचिव हैं। अनियतकालीन “उर्विजा” ,” फागुनाहट” का संपादन तथा हिंदी मासिक संवाद और “साहित्यांजलि” का विशेष संपादन कर चुके हैं। “ड्वाकरा” की टेली डक्यूमेंटरी फ़िल्म “नया विहान” के पटकथा लेखन से भी जुड़े रहे हैं। जीवन और जीविका के बीच तारतम्य स्थापित करने के क्रम में इन्होंने अध्यापन का कार्य भी किया, पत्रकारिता भी की, वर्त्तमान में ये विश्व के एक बड़े व्यावसायिक समूह में प्रशासनिक पद पर कार्यरत हैं। आजकल लखनऊ में हैं। इस वर्ष इनकी तीन पुस्तकें क्रमश: ताकि बचा रहे लोकतंत्र (उपन्यास) , हिंदी ब्लॉगिंग : अभिव्यक्ति की नई क्रान्ति (संपादित) तथा “हिंदी ब्लॉगिंग का इतिहास” एक साथ प्रकाशित हुई है है तथा प्रेम न हाट विकाय (उपन्यास ) प्रकाशनाधीन है !