नई दिल्ली। दिल्ली में शनिवार को 20वां विश्व पुस्तक मेला शुरू हो गया और पुस्तक प्रेमियों के रंग में फिर इसबार रंग गयी दिल्ली। मेले में दुनियाभर के 1,300 प्रकाशकों ने हिस्सा लिया है। प्रगति मैदान के 12 में से 10 हाल में 2,500 स्टाल लगाए गए हैं।
उद्घाटन के मौके पर केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा कि दो वर्षो में एक बार होने वाले इस मेले को वार्षिक बनाने के लिए प्रयास जारी हैं। सिब्बल ने प्रगति मैदान के हंसध्वनि थिएटर में 25 फरवरी से 4 मार्च तक आयोजित इस नौ दिवसीय मेले का उद्घाटन किया। सिब्बल ने क्षेत्र में मेले को सर्वश्रेष्ठ आयोजन बनाने के लिए एनबीटी के प्रयासों की भी सराहना की।
एनबीटी के निदेशक एम. ए. सिकंदर ने बताया,कि “जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों से साझेदारी के साथ ट्रस्ट मेले के प्रबंधन के मामले में और अधिक पेशेवर हो गया है।” सरकार से सहायता प्राप्त फिल्म संस्थान, विश्वविद्यालयों और व्यापार निकायों के अलावा कई गैर-लाभकारी संस्थाएं भी अपना सहयोग दे रही हैं।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अपने संदेश में कहा, “सिनेमा पर ध्यान केंद्रित करना हमें समाज को प्रभावित करने वाली अद्भुत परम्पराओं के बारे में जानने में मदद करेगा।”
इस बार यह मेला ‘साहित्य और सिनेमा के बीच सम्बंध’ विषय पर आधारित है। विश्व पुस्तक मेले में इस बार भारतीय सिनेमा के 100 वर्ष होने के अवसर पर सिनेमा आधारित एक थीम पवेलियन बनाया गया है। जो पुस्तक प्रेमियों के आकषर्ण का केन्द्र बना हुआ है। पवेलियन में हिन्दी, अंगेजी, तमिल, बांग्ला सहित विभिन्न भारतीय भाषाओं में फिल्मों से जुड़ी पुस्तकों के साथ साथ कई अन्य चीजें भी पेश की जा रही है। इन पुस्तकों के अलावा यहां फिल्मी दुनिया से जुड़े रूपहले पर्दे के किरदारों की मौजूदगी भी आम पुस्तक पेमियों की दिलचस्पी की वजह बनी हुई है.
पुस्तक मेले में फिल्मों से जुड़ी पुस्तकों के लोकार्पण और विचार गोष्ठियों में अभी तक शायर एवं गीतकार जावेद अख्तर, मशहूर हास्य अभिनेता सतीश कौशिक, फिल्म एवं टीवी की वरिष्ठ अभिनेत्री सुषमा सेठ सहित कई फिल्मी हस्तियां आ चुकी हैं. साथ ही कई अन्य फिल्मी हस्तियों के यहां आने का कार्यक्रम है. जाहिर सी बात है कि आम आदमी के सामने जब फिल्मी कलाकार हो तो वे पुस्तक को छोड़कर उनकी झलक पाने के लिए बेताब हो जाते हैं. सिनेमा थीम पवेलियन में यह नजारा आम देखा जा सकता है. पवेलियन में हिन्दी, बांग्ला, तमिल आदि भारतीय भाषाओं में बनी फिल्मों के पोस्टर भी लगाये गये हैं. इनमें देवानंद की गाइड, रेखा की उमराव जान और संजय दत्त की लगे रहो मुन्ना भाई जैसे मशहूर फिल्मों के पोस्टर शामिल हैं. साथ ही फिल्मों पर आधारित पुस्तकों के चित्रों को भी बड़े आकार में यहां सजाया गया है.
पवेलियन में एरिफ्लेक्स (माडल 2सी) 35 एमएम कैमरा भी लगाया गया है. इसी कैमरे से भारत के मशहूर फिल्मकारों सत्यजीत रे, रित्विक घटक, मृणाल सेन, उत्तम कुमार ने अपनी फिल्में बनाई थीं. साथ ही पवेलियन में एक पुराना ग्रामाफोन, फिल्मों की रील आदि को भी प्रदर्शित किया गया है. फिल्म निर्माण से जुड़ी इन सामग्रियों में पुस्तक प्रेमी खासी रूचि दिखा रहे हैं. पवेलियन में सिनेमा से जुड़ी एक अनूठी पुस्तक भी प्रदर्शित की गयी है. बेल लिपि में लिखी इस पुस्तक का नाम है ‘‘सिनेमा आफ सत्यजीत रे.’’ चार खंडों में यह पुस्तक चंदनदास गुप्ता ने लिखी है. इस पुस्तक को नेशनल बुक ट्रस्ट ने प्रकाशित किया है.
लोकपाल विधेयक के लिए पिछले कुछ समय से आदोलनरत समाजसेवी अन्ना हजारे के समर्थकों ने राजधानी में चल रहे विश्व पुस्तक मेले में अपना स्टाल लगाया है। इस स्टाल में लोकपाल से संबंधित किताबों को रखा गया है। स्टाल की ओर युवाओं की खासी रूचि दिख रही है। इस स्टाल में अन्ना संबंधी पुस्तकों, डीवीडी, टीशर्ट, टोपियों को बिक्री कर रहे हैं। अन्ना संबंधी स्टाल पर युवावर्ग की खूब भीड़ रहती है। पुस्तक मेले में पब्लिक काज रिसर्च फाउंडेशन की ओर से एक स्टाल लगाकर अन्ना हजारे संबंधित पुस्तकों और अन्य सामग्री की बिक्री की जा रही है। इस स्टाल में अन्ना हजारे की तस्वीर वाली एक डीवीडी है। डीवीडी में अन्ना ने ग्रामीण स्तर पर नेतृत्व तैयार करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी है। संस्था से जुडे़ जावेद ने बताया कि इस डीवीडी में अन्ना का जीवन परिचय भी स्वयं उन्हीं की आवाज में है। उन्होंने कहा कि यह डीवीडी इसलिए तैयार की गई है ताकि आम शहरी और ग्रामीण युवा वर्ग इसे देखकर अन्ना के व्यक्तित्व, उनके विचारों और उनके आदोलन को आसानी से समझ सके।
स्टाल पर लोकपाल संबंधी कई पुस्तिकाएं हैं। इनमें ”क्या है जनपाल” पुस्तिका शामिल है। इस पुस्तिका में उस लोकपाल यानी जनलोकपाल की जानकारी दी गई है। अन्ना टीम के सक्रिय सदस्य अरविन्द केजरीवाल द्वारा लिखी गई पुस्तक स्वराज भी यहा बिक्री के लिए रखी गई है। देश विशेषकर राष्ट्रीय राजधानी में लोकपाल विधेयक के लिए अन्ना हजारे का अनशन और आदोलन काफी चर्चा में रहा था। इसी आदोलन पर आधारित चित्रमय पुस्तक ”जन लोकपाल से जनतंत्र तक” को भी स्टाल पर लगाया गया है। इसी आदोलन से जुड़ी एक अन्य पुस्तक भी यहा प्रदर्शित हैं ”लोकपाल से स्वराज तक। दिलचस्प है कि स्टाल पर भले ही अन्ना के आदोलन से जुड़ी तमाम पुस्तिकाएं हैं लेकिन उनकी कोई भी जीवनी वहा मौजूद नहीं है। हालाकि कई अन्य प्रकाशकों ने अन्ना की जीवनी छापी है। स्टाल पर कई लोग तो केवल अन्ना की जीवनी की पूछताछ करते नजर आए। इस बारे में पूछने पर जावेद ने बताया कि अन्ना की कोई जीवनी उन्होंने तैयार नहीं की। उन्होंने बताया कि युवा वर्ग टीशर्ट और टोपी में ही अधिक रूचि दिखा रहा है।
विश्व पुस्तक मेले में फिल्मों के शौकीनों के पास साहित्यिक कृतियों पर बनी फिल्में देखने का शानदार मौका है। प्रगति मैदान के हॉल नंबर सात में बने थीम पैवेलियन में ऐसी फिल्मों का प्रदर्शन किया जा रहा है।

