SHUKLA BHRAMAR5
एक सरल सीधा गाँव ( प्रतापगढ़ उ.प्र.) में पला साधारण ईमानदार इन्सान -समाज की भलाई और हिंदी साहित्य के उन्नति में योगदान करते हुए बढ़ता चला ..बच्चे , फूल, संगीत , खरे, ईमानदार, सच को पसंद करने वाले लोग बहुत ही प्रिय हैं -ब्लॉग लेखन में रूचि -हिंदी कविता बहुत प्यारी है -
चिट्ठे - भ्रमर का दर्द और दर्पण, भ्रमर की माधुरी, रस-रंग भ्रमर का , बाल-झरोखा सत्यम की दुनिया , मुस्कान,प्रतापगढ़ साहित्य प्रेमी मंच ....आदि
शुक्ल भ्रमर ५
Ras bhari kavitayen, laghu kathayen geet atyant ruchikar aur gyanvardhk hain.
SUndar abhivyakti Shukl jee
निर्दयी मेघ
ये क्या कर गया
आना था धरती को सींचने
विभित्सिका छोड़ गया
हाहाकार मचा गया
निर्दोष जीवन पर
दोष लगाकर चल गया