पहले एक गृहिणी के घर में झाँक कर देखिए…सुबह सवेरे नींद खुलने से ले कर रात के सोने तक की उसकी दिनचर्या देखिए….अगर वह जवान है;तो उसके बच्चे छोटे है…सब से पहले उन्हें स्कूल के लिए तैयार करने की मानसिकता लिए हुए वह घर-गृहस्थी के काम काज की शुरूआत करेगी!…पति, स्वयं और सास-ससुर साथ रह रहे है तो उनके लिए चाय तैयार करना उसका सबसे पहला काम होगा!..उसके बाद बच्चों को जगा कर उनको दूध वगैरा देना और उनको स्कूल के लिए तैयार करना गृहिणी का दूसरा काम होगा!…स्कूल ले जाने के लिए लंच-बॉक्स तैयार करना भी महत्वपूर्ण काम है! यह भी गृहिणी बखूबी मन लगा कर करेगी!…
डॉ. अरुणा कपूर
सार्थक लेख
उसकी भी सुनें…उसे उदास मत होने दें!
सार्थकता लिए सटीक लेखन … आभार
gruhaniyon ke kam ko abhi bhi log koi tavajjo nahi dete…aise me unka is ekrasta se ub kar is tarh udas hona swabhavik hi hai….badiya post.
सार्थक आलेख।
यथार्थ से भरपूर रचना |
माननीय संगीता जी, सदा जी,कविता जी,निर्मला जी और सुधा जी!
…आप सभी ने इस कहानी को पसंद किया बहुत बहुत धन्यवाद!….लिखना सार्थक हुआ, इस बात का संतोष है!
….लगता है कि गूगल वेबसाइट में कोई प्रोबलम आ रही है!…मैं बहुत दिनों से कोशिश कर रही थी लेकिन पेज खुल नहीं रहा था!…रविन्द्र प्रभात जी को इ-मेल पर संदेशा भेजा!..उन्होंने ही यह समस्या दूर की और आज मैं यहाँ उपस्थित हो पाई!…उनका भी यहाँ पर धन्यवाद करती हूँ!