5:50 am - Thursday May 23, 2013

जनद्रोही क़ानूनों और राज्य दमन के ख़िलाफ़ साझा दस्तक का चौथा दिन

लखनऊ, 11 अगस्त। जनद्रोही क़ानूनों और राज्य दमन के ख़िलाफ़ विभिन्न जन संगठनों की साझा दस्तक के चौथे दिन का कार्यक्रम आज चौक चौराहे पर हुआ। भारत छोड़ो आंदोलन की 70वीं सालगिरह 9 अगस्त से शुरू हुआ यह जन जागरण अभियान स्वाधीनता दिवस, 15 अगस्त तक जारी रहेगा।

आज शाम 3 से 5 बजे तक चले जन संवाद के दौरान मायावती की मूर्ति तोड़े जाने का प्रसंग भी आया। अभियान ने माना कि इस वारदात के पीछे दलित विरोधी मानसिकता काम कर रही थी और उससे सामाजिक शांति के भंग होने का ख़तरा था। लेकिन उपद्रवियों पर देशद्रोह की धारा लगाना बेतुका है, सरासर अनुचित है। वैसे, यह जन पक्ष भी उभरा कि शासकों द्वारा जनता के पैसों से जीते जी अपनी मूर्ति लगवाना आख़िरकार लोकतंत्र को धूल चटाना है।

इसी कड़ी में अभियान की ओर से कहा गया कि क़ायदे से तो बाबरी मस्ज़िद को ढहानेवालों पर राजद्रोह का मुक़दमा चलाया जाना चाहिए था जिनकी करतूत ने पूरी दुनिया के सामने देश को शर्मसार करने का काम किया था। लेकिन आज 20 साल बाद भी उसके खलनायकों को अपने किये की सज़ा नहीं मिल सकी है। अभियान ने इस उलटबांसी को क़ानून-व्यवस्था की दुरंगी चाल का नमूना करार दिया।

कुछ लोगों ने अभियान को शैक्षणिक संस्थानों तक भी ले जाने का सुझाव दिया। अभियान के जत्थे में शामिल थे- केके शुक्ला, आदियोग, रामकृष्ण, एमके सिंह, अजीज़ुल हसन आदि। कल 13 अगस्त को कार्यक्रम के पांचवे दिन सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक हाई कोर्ट, सिविल कोर्ट और कलेक्ट्रेट में अभियान की दस्तक होगी।

सांस्कृतिक संगठन दख़ल की पहल पर आयोजित किये जा रहे इस कार्यक्रम के साझीदारों में राष्ट्रीय स्तर पर गठित काला क़ानून एवं दमन विरोधी मंच और सीमा-विश्वविजय रिहाई मंच के अलावा अमुक आर्टिस्ट ग्रुप, भारतीय जन संसद, इंडियन वर्कर्स कौंसिल, इनसानी बिरादरी, जन संस्कृति मंच, क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच, मज़दूर परिषद आदि जनपक्षधर संगठन शामिल हैं। कार्यक्रम का मक़सद है- जनद्रोही क़ानूनों और राज्य दमन के ख़िलाफ़ लोगों को जगाना और जोड़ना, सच्ची आज़ादी के लिए आवाज़ बुलंद करना।

Filed in: गतिविधियाँ

No comments yet.

Leave a Reply