
भारतीय संस्कृति में त्यौहारों का आदि काल से ही महत्व रहा है। हर त्यौहार के साथ धार्मिक मान्यताओं, मिथकों, सामाजिक व ऐतिहासिक घटनाओं और परम्परागत विश्वासों का अद्भुत संयोग प्रदर्शित होता है। त्यौहार सिर्फ एक अनुष्ठान मात्र नहीं हैं, वरन् इनके साथ सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक तारतम्य, सभ्यताओं की खोज एवं अपने अतीत से जुडे़ रहने का सुखद अहसास भी जुड़ा होता है। त्यौहारों को मनाने के तरीके अलग हो सकते हैं पर उद्देश्य अंततः एक ही है। यहां तक कि स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भी अपनी बात लोगांे तक पहँुचाने के लिए त्यौहारों व मेलों का एक मंच के रूप में प्रयोग होता था।
सरकारी सेवा में उच्च पदस्थ अधिकारी होने के साथ-साथ साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय 33 वर्षीय श्री कृष्ण कुमार यादव की रचनाधर्मिता को देश की प्रायः अधिकतर प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में देखा-पढा जा सकता हैं। विभिन्न विधाओं में अनवरत प्रकाशित होने वाले श्री यादव की अब तक कुल 5 पुस्तकें- अभिलाषा (काव्य संग्रह), अभिव्यक्तियों के बहाने (निबन्ध संग्रह), अनुभूतियां और विमर्श (निबन्ध संग्रह) और इण्डिया पोस्टः 150 ग्लोरियस ईयर्स, क्रान्ति यज्ञः 1857 से 1947 की गाथा प्रकाशित हो चुकी हैं।श्री यादव की रचनायें पचास से ज्यादा संकलनों में उपस्थिति दर्ज करा रहीं हैं और आकाशवाणी लखनऊ, कानपुर और पोर्टब्लेयर से भी उनकी रचनाएँ और वार्ता प्रसारित हो चुके हैं. श्री कृष्ण कुमार यादव ब्लागिंग में भी सक्रिय हैं और ‘शब्द सृजन की ओर’ और ‘डाकिया डाक लाया’ नामक उनके ब्लॉग चर्चित हैं.
राखी धागे का नहीं रिश्तों का बंधन है, भाई बहन के अटूट प्यार का प्रतीक है, ये अनमोल रिश्ता है जन्मों का हमारा, सुन्दर प्रस्तुती आप सबको राखी की शुभ कामनाएँ—–(शुभ शंध्या)
भावमय करती प्रस्तुति …
आपको इस स्नेहिल पर्व की अनंत शुभकामनाएं