वैसे तो प्रत्येक रिश्ते का जैसे पिता -पुत्र ,भाई -बहन माँ -पुत्री ,पति -पत्नी का अपना ही अलग महत्व होता है l परन्तु इनमें से भाई -बहन का रिश्ता अपनी एक खास पहचान व अहमियत रखता है l तभी तो इस रिश्ते को एक खास दिन “रक्षा बंधन “के नाम से समर्पित किया जाता है l “रक्षा -बंधन ” के अनुसार प्रत्येक भाई को अपनी बहन के प्रति अपने उत्तरदायित्व को निभाते हुए उसकी ताउम्र रक्षा करनी पड़ती है और बहन की हिफाजत के लिए भाई उसके चारों और सुरक्षा कवच का निर्माण कर देता है l किन्तु विडंबना यह है कि आज प्रत्येक रिश्ते की डोर ढीली पढ़ती जा रही है l
देखा जाये तो अब रिश्तों मे वह ऊष्मा ,गरिमा ,प्रेम ,सौहार्द अब कहा रहा है तो ऐसे में भाई -बहन का यह रिश्ता भी कितना मजबूत रह गया है इसका अनुमान लगाया जा सकता है l आए दिन अखबारों ,टी.वी.चैनल पर खबरें सुनने व देखने को मिलती हैं कि एक बहन पैतृक सम्पति लेने की लिए कोर्ट में अपने ही भाई के सामने कठहरे में खड़ी हुई l एक भाई ने अपनी बहन के साथ ही खून की होली खेली l यहाँ तक की एक भाई अपनी बहन के लिए अजनबी बनकर बर्बरतापूर्ण व अमानवीय व्यवहार करने को उतारू हो गया l और तो और मैंने यहाँ तक पढ़ा कि एक बहन-भाई द्वारा ही सरेआम सड़क बीच एक -दूसरे के प्रतिद्वंद्वी बन लाछन लगाया गया l यह बातें कहीं गड़ी गयी कहानियाँ नहीं अपितु हमारे समाज का कड़वा सच हैं l जिसे सुनकर हमारे मानसिक पटल पर गहरा आघात पहुँचता है l
मैं सोचती हूँ कि ऐसी कौन -सी परिस्थितियाँ जिम्मेदार हैं जिनके कारण भाई -बहन को एक -दूसरे का अविश्वास झेलकर मानसिक ,आर्थिक व शारीरिक रूप से उत्पीड़ित होना पड़ता है l आज यह पवित्र रिश्ता अनेकानेक पूर्वाग्रहों ,अन्धविश्वास व कुसँस्कारों से ग्रस्त हो रहा है l जिसके कारण समाज व परिवार में सुख-शान्ति के नाम पर अनेक रिश्ते भी दम तोड़ते नजर आते हैं l
आज सबसे अधिक जरूरत है इस बन्धन की पकड़ को मजबूत करने की l इसके लिए भाई-बहन को चाहिए कि वह सँस्कारों व परम्पराओं के बलबूते पर इस पवित्र रिश्ते को कायम रखें और कहीं भी रिश्तों को स्वार्थ के पलड़े पर न तोलें l अगर इसी तरह यह बन्धन ढ़ीला पड़ता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब इस रिश्ते से सभी का विश्वास उठ जाएगा और पवित्र रिश्ते को समर्पित यह दिन इतिहास के पन्नों में सिमट कर ही रह जाएगा l
डॉ.प्रीत अरोड़ा
शिक्षा-एम.ए हिन्दी पँजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ से (यूनिवर्सिटी टापर),पी.एचडी(हिन्दी)पँजाब विश्वविद्यालय चण्डीगढ़ से,बी.एड़ पँजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से . कार्यक्षेत्र—शिक्षिका अध्ययन एवं स्वतंत्र लेखन व अनुवाद । अनेक प्रतियोगिताओं में सफलता, आकाशवाणी व दूरदर्शन के कार्यक्रमों तथा साहित्य उत्सवों में भागीदारी, हिंदी से पंजाबी तथा पंजाबी से हिंदी अनुवाद। देश-विदेश की अनेक पत्र-पत्रिकाओं व समाचार-पत्रों में नियमित लेखन । वेब पर मुखरित तस्वीरें नाम से चिट्ठे का सम्पादन. अनेक किताबों में रचनाएँ प्रकाशित सम्मान-अमर उजाला की ओर से सम्मानित पुरस्कार-‘वुमेन आन टाप ’पत्रिका के ओर से कहानी पुरस्कृत (मई-2012 ) युवा लेखिका के लिए राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड (2012) से सम्मानित “अनुभूति” नामक काव्य-संग्रह का सम्पादन (प्रकाशाधीन ) मनमीत पत्रिका का अतिथि सम्पादन ।


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DR preet ji ne apne sunder aalekh me aaj ki pristhition me bhai bahan ke rishton me aa rhi girvat ko bahoot he sundarta se prastut kiya hai ,,dusra ye aalekh sunder sandesh bhi de rha haii ki”bhai aur bahno ko chahia ki vah sanskaron va pramprao ke balboote par iss pviter rishte ko kayam rakhen” umda lekh ke liye badhai.
बहुत बहुत धन्यवाद अमर जी
सार्थक लेख !