9:07 pm - Sunday May 19, 2013

असीम त्रिवेदी की गिरफ्तारी पर पूरे देश में रोष

aseem_trivedi_भारतीय संविधान को नीचा दिखाने और अपनी वेबसाइट पर ‘देशद्रोही’ सामग्री छापने के आरोप में कानपूर के मूल निवासी कार्टूनिस्ट असीम त्रिवेदी की मुम्बई में गिरफ्तारी पर उठे बवाल के बीच भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे संगठन इंडिया अगेंस्ट करप्शन यानी आईएसी ने मांग की है कि उन्हें तुरंत रिहा किया जाए क्योंकि उनके खिलाफ लगाए गाए आरोप निराधार हैं.उल्लेखनीय है की त्रिवेदी की गिरफ्तारी की भारत के विभिन्न हिस्सों में, सोशल और अन्य मीडिया पर जबरदस्त आलोचना हो रही है.आईएसी के अरविंद केजरीवाल ने कहा, ”देशद्रोह के आरोप तब लगते हैं जब कोई देश के खिलाफ युद्ध छेड़ता है. असीम त्रिवेदी के कार्टूनों बनाने पर इस तरह के आरोप नहीं लगाए जा सकते.”

इस बीच असीम की गिरफ्तारी पर मचे बवाल के बाद पुलिस ने माना कि उनकी पुलिस हिरासत की जरूरत नहीं थी. पुलिस ने अपना रुख बदला और असीम को अब 24 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.

महाराष्ट्र के गृह मंत्री आरआर पाटिल ने तो साफ कह दिया कि उनके पुलिस रिमांड की कोई जरूरत नहीं थी. उन्होंने कहा, ”पुलिस की जांच पूरी हो चुकी थी. पुलिस हिरासत की मांग करने की कोई जरूरत नहीं थी. मैं मामले की जांच कर रहा हूँ. हम यह बात अदालत में कहेंगे.”

केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जयसवाल ने कहा था, ”कुछ कार्यकर्ता हमसे मिले और उन्होंने हमें असीम त्रिवेदी की गिरफ्तारी की जानकारी दी. हम वहां सरकार से बात करेंगे. अगर मदद करने लायक होगा तो मदद की जाएगी.”

असीम त्रिवेदी की गिरफ़्तारी का विरोध करते हुए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मार्कण्डेय काटजू ने कहा कि असीम त्रिवेदी ने कोई ग़लत काम नहीं किया है.

जस्टिस काटजू ने कहा, ”मेरे विचार से कार्टूनिस्‍ट ने कुछ भी गलत या अवैध नहीं किया है. लोकतंत्र में बहुत-सी बातें कही जाती हैं. कुछ सही होती हैं, बाकी ग़लत. जिसने कोई अपराध नहीं किया हो, उसे गिरफ़्तार करना भी एक अपराध है.”

जाने माने कार्टूनिस्ट सुधीर तेलंग ने  सरकार और नेताओं को आडे हाथों लिया. उन्होंने कहा, ”संसद के अंदर तो इनका ‘सेंस ऑफ ह्युमर’ खत्म हो चुका है. संसद के बाहर भी इन्हें यह मंज़ूर नहीं है. साल 1975 में घोषित रूप से आपातकाल था. तब एक सेंसर बोर्ड होता था जो खबरों और कार्टूनों को सेंसर करता था.”

उन्होंने कहा, ”अब सेंसरशिप और आपातकाल की घोषणा नहीं की गई है. लेकिन यह अघोषित आपातकाल है जो और भी दुखद है, और भी खतरनाक है.”

वरिष्ठ पत्रकार और टीवी चैनल सीएनएन-आईबीएन के संपादक राजदीप सरदेसाई ने कहा है, ”मैं इसे बहुत खतरनाक मानता हूँ कि आप इस देश में नफरत भड़काने वाले भाषण से तो बच सकते हैं लेकिन राजनीतिक व्यंग्य के बाद आप तुरंत गिरफ्तार किए जाते हैं.’

सोशल नेटवर्किंग साइटों पर असीम की गिरफ्तारी का जबरदस्त विरोध हो रहा है और लोग उनकी रिहाई की मांग कर रहे हैं.

(बी बी सी (हिंदी) से साभार)

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