आज के इस भौतिकवादी युग में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका बदल रही है और ऐसे में शिक्षक और विद्यार्थी -वर्ग कैसे अछूते रह सकते हैं l ऐसा माना जाता है कि एक बच्चे के सर्वांगीण विकास में शिक्षक अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है जिसमें वह उसका शैक्षणिक,मानसिक,भावनात्मक,सामाजिक व साँस्कृतिक विकास भी करता है l यदि इतिहास के पन्ने पलट कर देखें तो हमें ऐसे पौराणिक प्रमाण प्राप्त होंगे जिसमें गुरू-शिष्य परम्परा के तहत शिक्षक निःस्वार्थ रूप से शिक्षा प्रदान करते हुए परस्पर सुदृढ़ सम्बन्ध स्थापित करता था l उस समय में न शिक्षक ही पूरी तरह कर्तव्यनिष्ठ होकर अपने कर्म को ही पूजा मानता था अपितु शिष्य भी गुरू को भगवान का दर्जा देता था l कुल मिलाकर दोनों का सम्बन्ध एक आदर्श उपस्थित करता था.परन्तु वर्तमान समय में समाज के बदलाव के साथ-साथ इनकी आदर्शवादी भूमिका में गिरावट आ गई है l चूंकि पैसा,नाम और शोहरत के कारण दोनों अपने कर्तव्य से विमुख हो रहे हैं l
लेख को लिखते वक़त लेखक ने इस मुद्दे को बड़ी सहजता के साथ रखा हैं !