3:36 am - Tuesday May 21, 2013

हाय ! मार गई मँहगाई

एक तो बढ़ती हुई बेरोजगारी और दूसरा दिन-प्रतिदिन तेजी से बढ़ती हुई मँहगाई ने लोगों का जीवन दुभर कर दिया है l पढ़ें-लिखें लोगों को रोजगार न मिलने से एक मध्यवर्गीय परिवार का खर्च इतना अधिक बढ़ गया है कि दो वक्त  की रोटी को भी जुटा पाना मुश्किल हो गया है l

अगर देखा जाएँ तो गैस,पैट्रोल,ड़ीजल,फल-सब्जियों के दाम आसमान को छूने लगें हैं जिसके कारण बच्चों को पौष्टिक आहार देने में माता-पिता असमर्थ हैं l ऐसे में क्या होगा देश का भविष्य ? हमारे नैनिहाल देश की बागडोर कैसे सँभालेंगे l मँहगाई के कारण ही लोग रातों-रात अमीर होने की चेष्टा में खाद्य पदार्थों में मिलावट करके मासूमों की जिन्दगी के साथ  खिलवाड़ कर रहे हैं l यह कहाँ तक उचित है ? ऐसे स्वार्थी लोगों को  सरकार की तरफ से भी अनदेखा किया जा रहा है l लोग रिश्वत देकर पकड़े जाने पर भी छोड़ दिएँ जाते हैं l

सही अर्थों में महँगाई के कारण लूटपाट,धोखाधड़ी,मिलावटखोरी,भ्रष्टाचार व बेरोजगारी आदि अनेकों समस्याएं जन्म ले रही हैं l मानवीय चरित्र इस कदर गिर गया है कि वह अपने नैतिक मूल्यों को भूलकर स्वार्थी,दम्भी होकर अन्धकारमयी जीवन  व्यतीत कर रहा है l निश्चित रूप से यह चिंता का विषय है l अतः सामाजिक कार्यकर्ताओं को इन समस्याओं को सुलझाने में कदम उठाने चाहिए l

डॉ.प्रीत अरोड़ा

जिला मोहाली की रहने वाली ड़ॉ प्रीत अरोड़ा को यंग और बेस्ट हिंदी लेखन के लिए राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड (2012) दिया गया है .पँजाब यूनिवर्सिटी से हिन्दी में पीएचडी  करने वाली ड़ा प्रीत भारत के इलावा अमरीका ,कनाडा ,ब्रिटेन,नेपाल ,यू.ए.ई.सहित अन्य कई देशों में प्रकाशित होने वाली मैगज़ीन में आर्टिकल लिखती हैं.इसके साथ ही ड़ा प्रीत पत्रिका और किताब का सम्पादन भी कर रही हैं. जिला मोहाली की रहने वाली ड़ॉ प्रीत अरोड़ा को यंग और बेस्ट हिंदी लेखन के लिए राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड (2012) दिया गया है .यह समारोह (speaker hall consitution club ,rafi marg ,new delhi ) में आयोजित किया गया था.यह अवार्ड उन्हें केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने दिया. इससे पहले भी इनकी कहानी और कविता को सम्मानित किया जा चुका है.पँजाब यूनिवर्सिटी से हिन्दी में पीएचडी करने वाली ड़ा प्रीत भारत के इलावा अमरीका ,कनाडा ,ब्रिटेन,नेपाल ,यू.ए.ई.सहित अन्य कई देशों में प्रकाशित होने वाली मैगज़ीन में आर्टिकल लिखती हैं.इसके साथ ही ड़ा प्रीत पत्रिका और किताब का सम्पादन भी कर रही हैं.प्रीत बताती हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा बच्चों और महिलाओं पर लिखना अच्छा लगता है I सम्मान-अमर उजाला की ओर से सम्मानित I पुरस्कार-‘वुमेन आन टाप ’पत्रिका के ओर से कहानी पुरस्कृत (मई-2012 )Iयुवा लेखिका के लिए राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड (२०१२) से सम्मानित I “अनुभूति” नामक काव्य-संग्रह का सम्पादन (प्रकाशाधीन ) I मनमीत पत्रिका का अतिथि सम्पादन I ब्लॉग–http://merisadhna.blogspot.in/ ईमेल—[email protected]

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3 Responses to “हाय ! मार गई मँहगाई”

  1. सामाजिक कायकर्ता भी तो मानव ही हैं… चरित्र तो उनका भी गिरा है.. वो क्या करेंगे…

  2. September 15, 2012 at 9:00 pm #

    bahut sundar,,,,,,,,

  3. September 15, 2012 at 9:24 pm #

    सच कहा ..मंहगाई ने मध्यम वर्ग और गरीब तबके की कमर तोड़ कर रख दी है …बेरोजगारी का तो आलम ही मत पूछो ..विचारपूर्ण लेख के लिए बधाई ….

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