हिन्दी भाषा सामाजिक,नैतिक ,सांस्कृतिक,व्यावहारिक मूल्यों व साहित्यिक विचारों की धरोहर है,जिसमें से सबसे उच्च आदर्शों का स्तम्भ हिन्दी में साहित्य -सृजन माना जाता है I हिन्दी सदियों से ही भारत की राष्ट्रीय अस्मिता तथा जन-जीवन की अभिव्यक्तियों का मूलाधार रही है , जिसके फलस्वरूप आज हिन्दी भाषा का साहित्य अत्यंत समृद्ध व उन्नत हैI हिन्दी भाषा के पास अनेक महान साहित्यकारों का साहित्यकोष सुरक्षित है,जिनमें ‘सूरदास’ ,’कबीर’ ,’तुलसीदास’ ,’प्रेमचन्द’,'जयशंकर प्रसाद’ ,’महादेवी वर्मा’,'सूर्यकान्त त्रिपाठी निराला’ व ‘सुमित्रानन्दन पन्त’ आदि महान विभूतियों ने हिन्दी -साहित्य की नींव को मजबूत करने के लिए एक भिन्न धरातल तैयार किया I इन सभी प्रतिभावान साहित्यिक मनीषियों की परम्परा को भारतीय व विदेशी पृष्ठभूमि पर आज अनेक साहित्यकारों द्वारा अपने-अपने ढ़ंग से आगे बढ़ाया जा रहा है I जब बात विदेशों में लिखे जा रहे हिन्दी साहित्य की आती है तो उसमें हमारी विश्व प्रसिद्ध वसुधैव कुटुम्बकम् की भावना से ओत-प्रोत संस्कृति ,सभ्यता एवं हिन्दी भाषा के प्रति प्रेम उद्वेलित होता नजर आता है I आज विदेशी पृष्ठभूमि पर भारतीय हिन्दी साहित्य के अनेकों साहित्यकार अपने गूढ़ अध्ययन,मनन एवं चिन्तन द्वारा साहित्यनिधि को ओर भी सुदृढ़ और सशक्त कर रहें हैं I भारतीय होने के कारण जहाँ वे हिन्दी भाषा का प्रचार-प्रसार विदेशों में कर रहें हैं ,वहाँ वे भारतीय संस्कृति एवं सभ्यता से भी विदेशियों को अवगत करवा रहें हैं I ये हमारे लिए गौरव की बात है कि मूलतः भारतीय लेखक विदेशों में केवल रोजी-रोटी के लिए नहीं बसे,अपितु वह तन-मन-धन से हिन्दी भाषा के विकास के लिए प्रयत्नशील हैं I
जिला मोहाली की रहने वाली ड़ॉ प्रीत अरोड़ा को यंग और बेस्ट हिंदी लेखन के लिए राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड (2012) दिया गया है .यह समारोह (speaker hall consitution club ,rafi marg ,new delhi ) में आयोजित किया गया था.यह अवार्ड उन्हें केन्द्रीय कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल ने दिया. इससे पहले भी इनकी कहानी और कविता को सम्मानित किया जा चुका है.पँजाब यूनिवर्सिटी से हिन्दी में पीएचडी करने वाली ड़ा प्रीत भारत के इलावा अमरीका ,कनाडा ,ब्रिटेन,नेपाल ,यू.ए.ई.सहित अन्य कई देशों में प्रकाशित होने वाली मैगज़ीन में आर्टिकल लिखती हैं.इसके साथ ही ड़ा प्रीत पत्रिका और किताब का सम्पादन भी कर रही हैं.प्रीत बताती हैं कि उन्हें सबसे ज्यादा बच्चों और महिलाओं पर लिखना अच्छा लगता है I सम्मान-अमर उजाला की ओर से सम्मानित I पुरस्कार-‘वुमेन आन टाप ’पत्रिका के ओर से कहानी पुरस्कृत (मई-2012 )Iयुवा लेखिका के लिए राजीव गाँधी एक्सीलेंस अवार्ड (२०१२) से सम्मानित I “अनुभूति” नामक काव्य-संग्रह का सम्पादन (प्रकाशाधीन ) I मनमीत पत्रिका का अतिथि सम्पादन I ब्लॉग–http://merisadhna.blogspot.in/ ईमेल—[email protected]
अच्छा लेख लिख दिया है प्रीत ने. सचमुच ये शोधपूर्ण लेख है. बधाई..लेखिका को…और धन्यवाद ‘परिकल्पना ‘ को.
SHODHPURN AALEKH BAHAI HO…
BUT aaz apne desh me hindi parai kyo ???
प्रीत जी अच्छा आलेख बधाई….विदेषों में रह रहे भारतवंषी हिन्दी के महत्व को समझते हैं, अफसोस भारत में ही हिन्दी के साथ दोयम दर्जे का व्यव्हार किया जा रहा है, दक्षिण के किसी भी राज्य में चले जाईये किसी भी दुकान, बस अथवा कार्यालय का बोर्ड आप हिन्दी में नहीं पायेंगे। देष से बाहर लिखे जा रहे हिन्दी साहित्य से हमें सबक लेना चाहिए।
अच्छा आलेख, हिन्दी दिवस की शुभकामनायें ।
बढ़िया आलेख.. धन्यवाद…