खुशियों के कुछ पलों के लिए घोंसले में चहकता है पंछी पंखो के बाहुपाश में समेटता चमन को । चोंच टकराता घरोंदे के ओर- छोर, उमंग ढूंडता जीतना चाहता अपने मौन को । मस्तमंगल धुन में, संसार के पराभव को गाना चाहता खुशी की व्यंजना में प्रेम का शब्दावरण पहनाना चाहता। क्रूर बाज के तीक्ष्ण निगाहों से घरोंदे को बचाना चाहता
बलबीर राणा “भैजी”
जन्म उत्तराखण्ड में जिला चमोली मल्ला दशोली पटटी के ग्राम मटई बैराशकुण्ड क्षेत्र में हुआ। बचपन पहाडी सीडी नुमा खेतों में कुदते फांदते गाय बकरियों के पीछे भागते बीता। ब्लॉग : “अडिग शब्दों का पहरा” http://balbirrana.blogspot.com/
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क्रूर बाज के तीक्ष्ण निगाहों से
घरोंदे को बचाना चाहता
bahut sundar