(1)
धुंधला सा कुछ छुपा हुआ सच्चाइयों में था
मेरा ही था वजूद जो परछाईयों में था
दीवार उठ गई है घरों के यूँ दरमियाँ
बाक़ी रहा न प्यार जो, दो भाइयों में था
हर एक से और ख़ुद से भी पूछा यही सवाल
अब वो सिला कहाँ है जो, अच्छाइयों में था
पंछी परों में हौसला लेकर उड़ा मगर
खुद खो गया था जब भी वो , ऊँचाइयों में था
रस्मों से पाँव बंध गये कुछ इस तरह मेरे
मिलने का अब ख़्याल भी रुसवाइयों में था
जो तजुरुबे थे उम्र के सब हो गए ग़लत
बदलाव इक ज़माने की अंगड़ाइयों में था
‘देवी’ तुम्हारे साथ तो कल था हुजूम एक
कुछ और था वो लुत्फ़ जो तन्हाइयों में था
(2)
ये दुनियाँ हैं घबराई महंगी दरों से
परेशां है उसपर वो बढ़ते करों से
मैं सुनसान बस्ती में जैसे ही आई
हुई बात मेरी कई पत्थरों से
घरों के किये बंद सब दर-दरीचे
सभी सहमे-सहमे हैं फ़ितनागरों से
नज़र आए आसार हड़ताल के जब
तो मालिक ने की सुलह कारीगरों से
जो हिम्मत से जाते हैं जंगो-जदल में
वो अच्छे हैं बेशक सभी कायरों से
लगा कर वो माथे पे टीका लहू का
कफ़न वीर बांधे चले हैं सरों से
हवाओं में तकरार होती है ‘देवी’
ये जाना परिन्दों के गिरते परों से
देवी नागरानी
रचनाकार परिचय: 11 मई 1949 को कराची (पाकिस्तान) में जन्मीं देवी नागरानी हिन्दी साहित्य जगत में एक सुपरिचित नाम हैं। आप की अब तक प्रकाशित पुस्तकों में “ग़म में भीगी खुशी” (सिंधी गज़ल संग्रह 2004), “उड़ जा पँछी” (सिंधी भजन संग्रह 2007) और “चराग़े-दिल” (हिंदी गज़ल संग्रह 2007) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त कई कहानियाँ, गज़लें, गीत आदि राष्ट्रीय स्तर के पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित होते रहे हैं। आप वर्तमान में न्यू जर्सी (यू.एस.ए.) में एक शिक्षिका के तौर पर कार्यरत हैं।…. वर्तमान संपर्क : Devi Nangrani, 9-D, Corner View Society, 15/33 Road, Bandra, Mumbai 400050. Ph: 9987928358


दोनों ही ग़ज़लें काबिले तारीफ हैं देवी नागरानी के साथ शेयर करने वालों को भी बधाई एवं आभार
देवी नागरानी जी ग़ज़ल की उस परंपरा से हैं जो सहज संप्रेषणीयता में विश्वास रखती है। पहेलियॉं बूझते उलझे हुए शेर कहना उनके मिज़ाज़ में नहीं; और यही उनकी ग़ज़ल को आम आदमी से जोड़ता है।
दो खूबसूरत ग़ज़ल के लिये बधाई।
दीवार उठ गई है घरों के यूं दरमियाँ
बाक़ी रहा न प्यार जो दो भाइयों में था
दोनों ग़ज़लें अच्छी हैं…नागरानी जी को बहुत-बहुत बधाई
DEVIL NAGRANI GI KI DONO GAJALE KABLE TARIF HEA ESME AAM VA KHASH AADMI KA DARD CHUPA HUAA HEA.
devi nagarani ji ki gajalen bahut badhiya lagi .. prastuti ke liye abhaar …
BAHUT HI SUNDER GAZAL Devi ji
Dono hi ghazalen achchhi hain nayapan liye huye, badhai
Devi Nangrani kee dono gazalen bahut khoob hain . unhen badhaaee aur shubh kamna .
Nangrani ji..namskaar…
aapki dono hi gazals bahut hi achhi lagi ..mei shubh kaamnaye aapke saath hai..
maine bahut si gazals suni aur padhi hai but aapki pahli gazal ki pahli line ne hi prabhavit kar dia…aise hi likhte rahiye..