4:56 am - Wednesday May 22, 2013

पटना में बारिश के बहाने कवियों ने चुप्पी तोड़ी !

बिहार की राजधानी पटना में कवियों का अद्भुत समागम दिखा। अवसर था ‘प्रगतिशील लेखक संघ‘ की पटना जिला इकाई के तत्वावधान में 30 सितम्बर को केदार भवन में आयोजित ‘बारिश‘ विषयक कविता-पाठ का । इस काव्य पाठ की अध्यक्षता युवा कवि राकेश प्रियदर्शी ने की तथा संचालन अरविन्द श्रीवास्तव ने किया।

बारिश को नया अर्थ और नया आयाम देते हुए चर्चित युवा कवि शहंशाह आलम ने इस अवसर को कुछ यूँ सार्थक किया- ‘मैं मुरीद हुआ इस बारिश का / जो मेरी खिड़की पर बरस रही है / झमाझम मीठे संगीत की तरह निरंतर‘।

काव्य पाठ को आगे बढ़ाते हुए युवा कवि राकेश प्रियदर्शी ने बारिश के मौसम को रेखांकित करते हुए सुनाया-‘ कितना बड़ा हो गया है घर/ सारा घर सारा आकाश/ हर कोने में काले-काले बादल/ और इन्द्रधनुष/ सिर्फ़ तुम्हारी आँखों में।‘

अरविन्द श्रीवास्तव ने कहा कि – ‘बारिश थी धरती पर / इसलिए बीजों में अंकुरण था / प्रस्फुटन था और था/ सिलसिला सृजन का ।‘ उन्होंने आगे कहा – अब बारिश भरी रातों में / सिहर उठता हूँ अक्सर/ जब महसूसता हूँ/ अपनी गर्दन पर / तुम्हारी साँसों की छुवन।‘

इस मौके पर डा. रानी श्रीवास्तव, राजेन्द्र राजन, परमानन्द राम आदि कवियों ने भी बारिश विषयक अपनी-अपनी स्तरीय कविताओं का पाठ किया।
धन्यवाद ज्ञापन कवि शहंशाह आलम ने किया।

- अरविन्द श्रीवास्तव, मधेपुरा
मोबाइल – 9431080862.

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