11:30 am - Sunday May 26, 2013

प्रगतिशील लेखक संघ सहरसा द्वारा कवि सम्मेलन आयोजित ।

रविवार (21 अक्टू. 2012) सहरसा में साहित्यिक सन्नाटे को तोड़ते हुए यहाँ के रचनाकारों ने प्रगतिशील लेखक संघ, जिला इकाई के बैनर तले गौतम नगर स्थित शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान में कवि सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ’ ने की तथा संचालन रामचैतन्य धीरज ने किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ गुवाहाटी (असम) से आये युवा कवि अरुणाभ सौरभ ने ‘तुम मेरी कविता में आना’ शीर्षक से की, उन्होंने कहा- घाट पर ही छटपटा कर सूख जाती है गंगा… ।’ युवा कवयित्री स्वाती शाकाम्भरी ने अपनी मैथिली कविता के माध्यम से उपस्थित श्रोताओं का ध्यान आकर्षित किया ।  कवि मुख़्तार आलम ने अपनी – अहंकार, काया और मैं नदी हूँ शीर्षक कविता से माहौल को खुशनुमा बनाया। रंगकर्मी व सिनेजगत से जुड़े किसलय कृष्ण ने कहा कि सहरसा में इस तरह का आयोजन स्वागतेय है। उन्होंने दुष्यंत की पंक्तियों से अपने काव्य की शुरुआत की। कवयित्री अपर्णा ने ‘जीवन संग्राम’ शीर्षक कविता से काव्य पाठ किया। मैथिली के चर्चित कवि अरविन्द नीरज ने अपने गीतों से श्रोताओं का भरपूर उत्साहवर्द्धन किया। कवि अरविन्द श्रीवास्तव ने ऐसे आयोजनों की सार्थकता को रेखांकित करते हुए अपनी ‘प्रेम’ शीर्षक कविता का पाठ किया। सहरसा प्रलेस के सचिव देवनारायण साह ने अपनी व्यंग्य कविता के माध्यम से वर्तमान यथार्थ को उकेड़ा। नवोदित कवि अरुण परासर अपनी कविता ‘खुद की बनाई गोलियों से मर रहा इंसान …। सुना कर श्रोताओं को सोचने पर विवश किया। कवि आचार्य धीरज ने – चांदनी मुस्कुराने लगी, आपकी याद आने लगी… गज़ल सुनाकर श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। सम्मेलन के अन्त में वरिष्ठ कवि हरिशंकर श्रीवास्तव ‘शलभ’ ने कोसी के ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए अपनी कविता – ‘यह कोसी तट वंशीवट है, ग्राम्य किशोरी का पनघट है।’ को सुना कर आयोजन को यादगार बना दिया। इस सफल आयोजन पर शशि सरोजनी रंगमंच सेवा संस्थान के सचिव वंदन कुमार वर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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One Response to “प्रगतिशील लेखक संघ सहरसा द्वारा कवि सम्मेलन आयोजित ।”

  1. October 22, 2012 at 12:11 pm #

    shubhkamnayen….

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