2:48 am - Tuesday May 21, 2013

समझौता रावण से ……

हास्य-व्यंग्य

यूँ तो हम हर साल दशहरा मनाते हैं,
रावण के पुतले को पटाखों से सजाकर,
सामूहिक उत्सव में धूमधाम से जलाते हैं।
और नकली रावण को जलाने के लिए
अक्सर असली रावण को बुलाते हैं,

पटाखों की हर आवाज के साथ,
रावण अट्टाहास करता है,
क्योंकि भारत में कई कलियुगी रावण,
बड़े मजे से राज करता है।।

होकर व्यथित राम ने सोचा,
कुछ न कुछ अब करना होगा।
जल्द से जल्द किसी तरह भी,
राम के खाली पदों को भरना होगा।।
क्योंकि हर रावण के पीछे राम चाहिए,
अंगद और हनुमान चाहिए।
राम राज्य लाने की खातिर,
विभीषण जैसा नाम चाहिए।

रावण बोला हे राम,
तू व्यर्थ देख रहा है सपना।
इतने बरस बीत गए,
क्या बनबा सका तू मंदिर अपना।।

राम बोला हे दशकंधर,
तेरी संख्या लगातार बढ़ रही है अंदर अंदर।
मेरे भक्त मेरे ही रथ पे होकर सवार,
कर दिया मुझको बेबस और लाचार।।

हे दशानन,
तेरे विचार लगते अब पावन।
तुम्हीं बताओ कोई राह,
जो पूरा हो जन जन की चाह।।

रावण बोला हे राम,
तुम व्यर्थ ही हो परेशान।
आओ हम तुम मिलकर,
चुनाव पूर्व गठबंधन बनायें।
जीत जाने पर
प्रजा को ठेंगा दिखायें।।

श्यामल सुमन


श्यामल सुमन यानी संघर्ष संघर्ष और लगातार संघर्षों से निकला एक साधारण इंसान जो अपनी वैचारिक प्रतिबद्धता और जीवन-कर्म के बीच की दूरी को निरंतर कम करने की कोशिश में आज भी संघर्षरत है. शिक्षा – स्नातक /तकनीकी शिक्षा – विद्युत अभियंत्रण में डिप्लोमा /सम्प्रति – प्रशासनिक पदाधिकारी टाटा स्टील, जमशेदपुर/ रुचि के विषय : नैतिक-मानवीय मूल्य एवं सम्वेदना…..छात्र जीवन से ही लिखने की ललक, स्थानीय समाचार पत्रों सहित देश के कई पत्रिकाओं में अनेक समसामयिक आलेख समेत कविताएँ, गीत, ग़ज़ल, हास्य-व्यंग्य आदि प्रकाशित…स्थानीय टी.वी. चैनल एवं रेडियो स्टेशन में गीत, ग़ज़ल का प्रसारण, कई कवि-सम्मेलनों में शिरकत और मंच संचालन। अंतरजाल पत्रिका “अनुभूति, हिन्दी नेस्ट, साहित्य कुञ्ज, आदि में अनेक रचनाएँ प्रकाशित। इनका ब्लॉग है : http://manoramsuman.blogspot.in/

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One Response to “समझौता रावण से ……”

  1. October 26, 2012 at 4:23 pm #

    bahut hi sundar kataksh! vartmaan sandrbh me ek dam fit1

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