6:34 am - Monday May 20, 2013

ओमप्रकाश यती की गज़लें

(एक)

बुरे  की हार हो जाती है अच्छा जीत जाता है

मगर इस दौर में देखा है पैसा  जीत जाता है

बड़ों के क़हक़हे ग़ायब, बड़ों की मुस्कराहट गुम

हँसी की बात आती है तो बच्चा जीत जाता है

खड़ी  हो  फ़ौज  चाहे  सामने  काले अँधेरों की

मगर उससे तो इक दीपक अकेला जीत जाता है

हमेशा जीत निश्चित तो  नहीं है तेज़ धावक की

रवानी हो जो जीवन में तो कछुआ जीत जाता है

ये भोजन के लिए दौड़ी  वो जीवन के लिए दौड़ा

तभी  इस दौड़ में बिल्ली से  चूहा जीत जाता है

(दो)

दुख   तो   गाँव – मुहल्ले के भी हरते आए बाबूजी

पर  जिनगी  की  भट्ठी  में ख़ुद जरते आए बाबूजी

कुर्ता, धोती, गमछा, टोपी सब जुट पाना मुश्किल था

पर  बच्चों  की फ़ीस  समय से  भरते आए बाबूजी

बड़की  की शादी  से लेकर फूलमती  के गौने  तक

जान  सरीखी  धरती  गिरवी  धरते  आए  बाबूजी

रोज़ वसूली कोई  न कोई, खाद कभी तो बीज कभी

इज़्ज़त की  कुर्की  से  हरदम  डरते  आए  बाबूजी

हाथ न आया एक नतीजा, झगड़े सारे जस के तस

पूरे  जीवन कोट – कचहरी   करते   आए   बाबूजी

नाती-पोते  वाले  होकर  अब  भी गाँव में तन्हा हैं

वो  परिवार  कहाँ  है जिस पर मरते  आए बाबूजी

()  ओमप्रकाश यती

 omprakash yatiजन्म :      3 दिसम्बर सन् 1959 को बलिया, उत्तर  प्रदेश के “ छिब्बी ” गाँव में।  शिक्षा :सिविल इंजीनियरिंग तथा विधि में स्नातक और हिन्दी साहित्य में एम.ए।   प्रकाशन :    ग़ज़ल संग्रह “बाहर छाया भीतर धूप”1997 और “सच कहूँ तो” 2011 में प्रकाशित. कमलेश्वर द्वारा सम्पादित हिन्दुस्तानी ग़ज़लें , ग़ज़ल दुष्यन्त के बाद….(1),  तथा कई अन्य महत्वपूर्ण  संकलनों में ग़ज़लें और हाइकु-2009 में  हाइकु सम्मिलित। अनेक प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं तथा ई-मैगज़ींस में रचनाएं समय-समय पर प्रकाशित।  अन्य :  नागपुर में आयोजित आकाशवाणी  के सर्व भाषा कवि-सम्मेलन -2008 में कन्नड़   कविता के अनुवादक कवि के रूप में भागीदारी. 1995 में हिंदी अकादमी ,दिल्ली द्वारा पुरष्कृत । दूरदर्शन तथा आकाशवाणी के अनेक केन्द्रों से रचना-पाठ।   इन्टरनेट के कविताकोश (kavitakosh.org) के रचनाकारों में से एक।  इन्टरनेट रेडियो (radiosabrang.com) पर सस्वर काव्य-पाठ उपलब्ध ।    सम्प्रति :      उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग में सहायक अभियन्ता  पद पर कार्यरत । सम्पर्क  : एच- 89 , बीटा-2 ,ग्रेटर नौएडा -201308, (मो.)-09999075942 , 09410476193, ई-मेल :[email protected] , [email protected], ब्लॉग  :   omprakash-yati.blogspot.com    

Filed in: ग़ज़ल

3 Responses to “ओमप्रकाश यती की गज़लें”

  1. December 24, 2012 at 5:29 pm #

    OM PRAKASH YATI JI KO BHADHAAEE AUR SHUBH KAMNA UNKEE
    UMDAA GAZALON KE LIYE .

  2. December 25, 2012 at 6:19 pm #

    aadarneey Pran Sharma ji,
    aapka sneh mera sambal hai….abhaar.

  3. December 26, 2012 at 9:44 am #

    गजल की यही विशेषता है कि कम शब्दों में ऐसी बात कह दे जो सीधे दिल में उतर जाए | ओमप्रकाश जी की गजले वाकई बहुत आसान और बहुत ही अच्छी हैं | इन सारगर्भित गजलों के लिए धन्यवाद |

    सादर

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