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होली के चार रंग : मदन मोहन ‘घोटू’
(एक)
चुनाव के बाद
तुम संग कैसे खेले होली
तुम हो नार बड़ी बडबोली
नारी दिवस पर दुखिया नारी
मायावती...
इंसानी फितरत
जब जब अकेली होती हूँ
जी भर कर रोती हूँ ,
कैसे बताऊ मन की व्यथा ?
रोज़ टूटती हूँ
फिर उठ खुद को जोडती...
आखिरी मुलाकात…
ना जानें कौन सी मुलाकात आखिरी हो;
वो शब्द आखिरी हो, संवाद आखिरी हो
अरमां जो पुरे ना हो सके कभी
बेतुकी...
कविता:सजा
कविता :
कल रात एक झटके में
तिनका तिनका बिखर गया
आंधी आई और सब
गुजर गया
तूफ़ान उसके देस में चला
आशियाँ...
मानव मेहता की दो कविताएँ
तेरी महक (सबा)
कुछ लफ्ज़ अपनी मोहब्बत के-
बिखेर दो मेरे आँगन….
इन हवाओं में घोल दो-
अपनी चाहत...
अलका सैनी झार की कविता:खंडहर
खंडहर
(एक)
खंडहर हुआ महल अपने
बोझिल अक्स को
मूक आँखों से रहा निहार ,
जहाँ थी कभी यौवन
भरे उपवन की...
अलका सैनी “झार” की कविता :अस्तित्वहीन
घूरती उन पेजिल पथराई
आँखों के आंसुओं को
मेट्रो के रात के स्याह सुनसान अंधेरे में
दहशतगर्द नम...
रियो-कुछ शब्द चित्र
१
सागर के तट पर,
अठखेलियाँ करता यौवन
बड़े बड़े दरवाजे,
छोटी सी चिलमन
२
बूढ़े के आस पास,
दो दो हसीनायें
और...
सन्देश प्रकृति का
कविता
तुम्हारी जिज्ञासा और मेरा कौतूहल
एक दिन पहुँचे क्षितिज के पास,
अठखेलियाँ करती परियाँ...
ख़ामोशी… बहुत कुछ कहती है…
आप सबने मेरी ख़ामोशी में बड़ी ख़ामोशी से साथ दिया है… मेरी खामोश हौसला-आफजाई की है… हमेशा...

