Archive: चाँद के पार Subscribe to चाँद के पार
चांद और बदली में हो गयी खटपट
चांद और बदली में हो गयी खटपट
रूठी हुई बदरिया सूरज से करके घूंघट
सिसकिया……………
भर-भर के...
आज चाँद पूरा है फलक पर
चाँद
हर दिन के साथ बढ़ता हुआ
हर दिन के साथ घटता हुआ
जिंदगी के उतार-चढ़ावों को
अपनी चाँदनी से सराबोर...
रात चाँद खुश था मुस्कुरा कर मिला….
चाँद!
ख़्वाबों में एक आस जगा कर मिला
रात चाँद खुश था मुस्कुरा कर मिला
गम-ए-दिल दवा बनी दीदार-ए-यार...
चौदहवीं का चाँद हो
चाँद आज भी लुभाता है , अपनी चाँदनी साझा करता है … विज्ञान ने जो भी सत्य बताया हो उस पर अपने
कदम...
वाह रे चाँद बस का….
ललित निबंध
बस में चांद आपका अपना साथी हो सकता है जैसा कि मेरा हो गया, किन्तु वो आपके “बस” में रहे,...
जीवन के रंगमंच से….चाँद के पार
वेब दुनिया इंदौर की वरिष्ठ सदस्या स्मृति जोशी को हिंदी जगत में एक प्रखर लेखिका के रूप में जाना...
चाँद के पार …
उड़ती हुई धूल;
चुभते हुए शूल,
कहीं खिले तो
कहीं मुरझाये फूल,
कहीं वाद;
कहीं प्रतिवाद,
जीवन का निरंतर
जीवन...
चाँद के पार यादों का अम्बार , चाँद भी बस सुनता जा रहा है ….
चाँद के पार यादों का अम्बार , चाँद भी बस सुनता जा रहा है ….
यादों की पिटारी
कानों में मिसरी-सी...
चाँद रोया !!!
चाँद रोया !!!
उन्हें मालूम था
कुछ सीढियां लगाकर
मैं चाँद से बातें कर लूँगी….
बड़ी संजीदगी से...
चाँद के पार :एक नाम , जिनसे आप सबकी पहचान ब्लॉग की पगडंडियों से है
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं
एक तरफ उसकी कीमत होती है
दूसरी तरफ एक चित्र !…..
फिर तुम चाँद को...

