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Archive: विविध Subscribe to विविध

TRANSLATED BY DINESH KUMAR MALI / ISBN 978-93-81945-20-9 / Price 495/-

तरह तरह की अनुभूतियों से सजी ओड़िया-भाषा की प्रतिनिधि कविताएं

पुस्तक समीक्षा : हम यह कह सकते हैं कि आधुनिक ओड़िया-गद्य साहित्य के साथ-साथ आधुनिक ओड़िया कविताओं...
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काहे का साहित्यकार है: सुभाष चन्द्र कुशवाहा

बाराबंकी। कचेहरी परिसर में आए हुए अबरार अहमद ने कहा कि “सुभाष चन्द्र कुशवाहा ए.आर.टी.ओ काहे...
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नो मोलभाव, रेट फिक्स,आप को टिकट चाहिए ?

व्यंग्य आप को टिकट चाहिए| मिलेगा, जरूर मिलेगा| पर आप को टिकट क्यों चाहिए? अच्छा, सेवा के लिए| हां,...
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मदन मोहन बाहेती’घोटू’ की दो कविताएँ

रसोई घर-सबसे बड़ी पाठशाला ———————————— रसोईघर, सबसे बड़ी पाठशाला है जहाँ,हर...
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हिंदी ब्लॉग जगत में टिप्पणिया और उनका महत्त्व

मई के महीने की बात हैं , हिंदी ब्लॉग जगत के धुरंधर श्री अविनाश वाचस्पति जी ने अपने एक ब्लॉग का...
इस उपन्यास में राष्ट्र की 'संज्ञा' को भी परिभाषित किया गया है,व्यक्ति और राष्ट्र के बीच उत्पन्न हुए द्वन्द-प्रसंगों का भी उल्लेख किया गया है। इस उपन्यास में राष्ट्र को परिभाषित करते हुए लेखिका पाठकों के सम्मुख कुछ सवालों के जरिये हकीकत को उकेरती है ,इराक के ऊपर अमेरिका का आक्रमण किसकी इच्छा से हुआ था जार्ज बुश या अमेरिका की ? गर्बाचोव न होते तो पेरेस्त्रोइका संभव हो पाती क्या रूस में ? इन बातों से यह जाहिर होता है राष्ट्र नामक किसी भी चीज का कोई अस्तित्व नहीं है। शासक से राष्ट्र कभी बड़ा नहीं हो पाता है। शासक के मूड़ और मर्जी से परिचालित होता है एक विशाल लोकतान्त्रिक संस्था, जिसमे करोड़ों लोगों की आस्था टिकी हुई होती है, इसलिए राष्ट्र और व्यक्ति के संघर्ष हमेशा व्यक्ति व्यक्ति के निजी संघर्ष से उत्पन्न होते हैं।“

राष्ट्र की ‘संज्ञा’ को परिभाषित करता एक उपन्यास ( ‘राष्ट्र समूह वाचक नहीं, बल्कि व्यक्ति वाचक’)

‘बंद कमरा’ उपन्यास में राष्ट्र की ‘संज्ञा’ को भी परिभाषित किया गया है,व्यक्ति और राष्ट्र...
jagjit singh

जाने वो कौन सा देश, जहाँ तुम चले गए ?

ग़ज़ल गायक जगजीत सिंह का निधन “चिट्ठी न कोई सन्देश,जाने वो कौन सा देश, जहाँ तुम चले गए ” जैसे...
Durga bhabhi1

एक क्रान्तिकारी महिला: दुर्गा भाभी

जयन्ती (7 अक्टूबर पर विशेष) वर्ष 1927 का दौर। साइमन कमीशन का विरोध करने पर लाहौर में प्रदर्शन का नेतृत्व...
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बारिस का मौसम भी होता है लाजवाब

कविता हर दिल लगता है गुनगुनाने, रिमझिम-रिमझिम बरसता पानी, पत्तो से बहता पानी, किसानो के लिए लाता...
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शक्ति के कई रूप हैं , कई रंग हैं , कई आकार….

शक्ति – नारी, ईश्वर , जादू, प्रकृति, सहनशीलता , संजीवनी … शक्ति के कई रूप हैं , कई रंग हैं , कई आकार एक...