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Archive: कहे कबीर Subscribe to कहे कबीर

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कबीरदास की साखियाँ

संत कबीरदास जी कवि व क्रांतिकारी समाज सुधारक थे.उन्होंने अपने काव्य में सामाजिक कुरीतियों...
तर्कहीन जोडी

तर्क और तकरार…

संत कबीर के बारे में यह धारणा आम थी की उनका दाम्पत्य जीवन बहुत सुखी है और उन पति-पत्नी के बीच कभी...
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कबीर अपने विचारों में कॉस्मोपोलिटन थे ।

मूल्यांकन प्रतिरोध की स्थिति में हम सब कबीर को क्यों याद करते हैं? क्या कबीर आज भी हमारे दैनिक...
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कबीर और मैं

कबीर कवि और समाज सुधारक थे – निर्भीक कवि , निर्भीक सुधारक . मैं लिख लेता हूँ , समाज में गुरु से...
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चुभ-चुभ कर भीतर चुभे, ऐसे कहे कबीर.

महाभारत काल में माँ के द्वारा त्यागे जाने और फिर अधिरथ द्वारा पाले जाने वाले कर्ण ने जैसे उस...
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सुख में सुमिरन ….

कबीर रहता है मेरे मन में खड़ा होता है भरी भीड़ में टूटते भंग होते मोह को देख रोता है जार जार सन्नाटे...
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कहे कबीर…….उँगलियॉ बेचैन हैं ज़ख्म कुरेदने वाले…!

रुदन और क्रंदन तभी सार्थक हैं जब दिलासे की थपथपाहट मिले दर्द का बयां तब करो जब संवेदना की आहट...
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दिया कबीरा रोये

कबीर की वाणी कबीर का नाम कबीर की ख्वाहिश और चलती चक्की से भी तेज चलता समय …. अब तो साई इतना देते...
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‘कबिरा खड़ा बजार में’

‘कबिरा’ अब बाज़ार में खड़ा होकर सबकी ख़ैर नहीं माँगता। वह अपने काम का पैसा माँगता है। यह कोई...
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कबीर का युग तो गयो भाई , अब इस युग की बात करौ न कोय ….

कबीर का युग तो गयो भाई , अब इस युग की बात करौ न कोय …. बात करोगे तो वक़्त चला जायेगा और नया सार...