Chatur Kabootar – चतुर कबूतर A Hindi Story

Chatur Kabootar

एक गांव में एक बहेलिया रहता था. वह रोजाना जंगल में जाकर शिकार करता था. इस तरह वह शिकार करके अपने परिवार का पालन पोषण करता था. एक दिन उसने जंगल में कबूतरों के झुंड को उड़ते हुए देखा और सोचा कि कितने सुंदर कबूतर है. अभी इन्ही को मैं अपने जाल में फंसा लूंगा. इतने सारे कबूतर के मुझे बहुत सारे पैसे हैं मिल पाएंगे. दूसरे दिन बहेलिया सुबह सुबह जल्दी जंगल में जाता है और जंगल में जाकर दाने फैलाकर उसमें जाल डाल देता है ताकि कबूतरों का झुंड लालच में फंस जाए और खुद एक पेड़ के पीछे छुप कर कबूतरों के आने का इंतजार करता है.

तभी कबूतरों का झुंड वहां पर उड़ता हुआ आ जाता है. उनमें से एक कबूतर की निगाह जमीन पर रखे दानों पर पड़ती है. वह अपने साथियों से कहता है अरे दोस्तों नीचे देखो इतने सारे दाने जमीन पर रखे हैं. दूसरा कहता है हम कितनी देर से भोजन ढूंढ रहे हैं. उन सभी के मुंह में पानी आ जाता है. तीसरा कहता है जल्दी चलो बहुत भूख लग रही है. तब भी एक अनुभवी कबूतर बोलता है रुको, रुको मित्रों तुम लोग ये तो सोचो कि इतने घने जंगल में इतने सारे दाने आए कहां से?

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मुझे तो यह किससे बहेलिये का काम लगता है. उसने जरूरत हमें फ़साने के लिए हमें यह दाना डालेंगे. एक कबूतर कहता है दादा आप शांत रहे तो अच्छा है. इन बुजुर्गों को तो हर जगह खतरा ही दिखाई देता है. दूसरा कहता है मित्रों इनकी बातों पर ध्यान नहीं दो. नहीं तो हम भूखे मर जाएंगे. वैसे ही बहुत भूख लगी है. तीसरा कहता है खाना मैं सामने हम सब को भूख लग रही है और यह हमें खाना खाने से रोक रहे हैं.

सभी कबूतर नीचे की तरफ उड़ते हैं और जमीन पर उतर का दाना चुगना शुरू कर देते हैं सिर्फ बड़ा कबूतर पेड़ पर बैठ जाता है. जब कबूतरों का एहसास होता है कि उनके पंख किसी चीज में उलझ गए हैं उन सभी कबूतर जाल से निकालने की बहुत कोशिश की लेकिन बहेलिये के जाल से नहीं निकल पाए. उनमें से एक कबूतर कहता है दोस्तों हमें दादा की बात मान लेनी चाहिए थी और यह सुनकर सारे कबूतर चिल्लाने लगे.

तुम सब आपस में लड़ना बंद करो और मेरी बात सुनो दादा बोले. इस तरह लड़कर तुम कभी भी जाल से बाहर नहीं निकल पाओगे लेकिन एक साथ कोशिश करने पर कुछ हो सकता है. सभी कबूतरों ने बूढ़े कबूतर की बात को अच्छी तरह सुना और दूसरी तरफ बहेलिया सारे कबूतरों को जाल में फंसा देखकर बहुत खुश हो रहा था. उसे क्या पता था कि उसके सारे शिकार थोड़ी देर में वहां से भाग निकलेंगे. जैसे ही बहेलिया उन्हें पकड़ने के लिए जाल के पास आता है तभी सभी कबूतरों ने एक साथ पंख फड़फड़ा ने शुरू कर दिए और जल्द ही वह जाल समेत हवा में उड़ गए. बहेलिये को बिल्कुल भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि कबूतर इस तरह जा लेकर उड़ जाएंगे.

वह बस दुखी मन से उड़ता हुआ देखता रहा. बड़ा कबूतर उन्हें अपने मित्र चूहे के पास ले जाता है और उससे कहता है की जल को काट दें. वह पूरे जाल को काट देता है और सभी कबूतर मुक्त हो जाते हैं इस कहानी से हमें शिक्षा मिलती है की एकता में शक्ति होती है

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