Tag Archives: chand ke par
रात चाँद खुश था मुस्कुरा कर मिला….
चाँद!
ख़्वाबों में एक आस जगा कर मिला
रात चाँद खुश था मुस्कुरा कर मिला
गम-ए-दिल दवा बनी दीदार-ए-यार...
चौदहवीं का चाँद हो
चाँद आज भी लुभाता है , अपनी चाँदनी साझा करता है … विज्ञान ने जो भी सत्य बताया हो उस पर अपने
कदम...
चाँद के पार …
उड़ती हुई धूल;
चुभते हुए शूल,
कहीं खिले तो
कहीं मुरझाये फूल,
कहीं वाद;
कहीं प्रतिवाद,
जीवन का निरंतर
जीवन...
चाँद के पार यादों का अम्बार , चाँद भी बस सुनता जा रहा है ….
चाँद के पार यादों का अम्बार , चाँद भी बस सुनता जा रहा है ….
यादों की पिटारी
कानों में मिसरी-सी...
चाँद रोया !!!
चाँद रोया !!!
उन्हें मालूम था
कुछ सीढियां लगाकर
मैं चाँद से बातें कर लूँगी….
बड़ी संजीदगी से...
चाँद के पार :एक नाम , जिनसे आप सबकी पहचान ब्लॉग की पगडंडियों से है
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं
एक तरफ उसकी कीमत होती है
दूसरी तरफ एक चित्र !…..
फिर तुम चाँद को...

