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कबीर और मैं
कबीर कवि और समाज सुधारक थे – निर्भीक कवि , निर्भीक सुधारक . मैं लिख लेता हूँ , समाज में गुरु से...
सुख में सुमिरन ….
कबीर रहता है मेरे मन में
खड़ा होता है भरी भीड़ में
टूटते भंग होते मोह को देख
रोता है जार जार
सन्नाटे...
कबीर का युग तो गयो भाई , अब इस युग की बात करौ न कोय ….
कबीर का युग तो गयो भाई , अब इस युग की बात करौ न कोय ….
बात करोगे तो वक़्त चला जायेगा और नया सार...
कबीर ने हमेशा ‘सच’ का पक्ष लिया।
कबीर …. यह नाम लेते ज़िन्दगी के तथ्य बड़ी बड़ी आँखों के साथ हमारे अन्दर मार्ग प्रशस्त करने...

