Tag Archives: Kavita
ख़ामोशी… बहुत कुछ कहती है…
आप सबने मेरी ख़ामोशी में बड़ी ख़ामोशी से साथ दिया है… मेरी खामोश हौसला-आफजाई की है… हमेशा...
जीना पड़ता हैं
सच कहू तो फूलो को भी खिलना पड़ता हैं
राजी नहीं हैं कोई भी , की ,जनम वो ले /
आता हैं रोते रोते , कुछ देर...
मैं सरकारी अफसर हूँ
मैं सरकारी अफसर हूँ
मैंने कुछ पुस्तके पढ़ी हैं
इसलिए ज्ञान मेरे अन्दर ही समाया हैं
मैकाले की...
वो रात..
कल की काली अँधेरी रात…
किसी रौशन दिन से भी ज्यादा रौशन थे
वो सामने थी मेरे
कई महीनो बाद और मैं...
परख लो मुझे
एक सोच फ़िर से देता हूँ तुम्हे
वक्त लेना
ख़ुद को बिल्कुल एकाकी कर लेना
सोच में।
फ़िर देखना क्या...
चांद और बदली में हो गयी खटपट
चांद और बदली में हो गयी खटपट
रूठी हुई बदरिया सूरज से करके घूंघट
सिसकिया……………
भर-भर के...
घर : दस भावचित्र
(1)
ये बया के घोंसले हैं,
नीड़ हैं, घर हैं- हमारे
जगमगाते भर दिखें
सो टोहती हैं
केंचुओं की मिट्टियाँ...
क्यों, आखिर मैं क्यों हूँ…
कौन हूँ मैं…
अभी कुछ दिनों पहले ही तो
ये सवाल आया था मेरी जिंदगी में
जवाब खोज पाता इससे पहले...
इक हसीं पड़ाव की तलाश में चलता रहा मैं
इक हसीं पड़ाव की तलाश में चलता रहा मैं
रौशनी की ख्वाहिश में जलता रहा मैं
कहीं खो न दूँ होश अपने...
मेरी पहली कविता: “तुम्हारा ही हँसता चेहरा…”
एक रात छत पर अकेले बैठे हुए कुछ लाइंस दिमाग में घुमने लगी… तुंरत अपने कमरे में आया और अपनी डायरी...

