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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक के ताज़ा दोहे

तोतापरी-बनारसी, देशी-क़लमी आम। भाँति-भाँति के आम हैं, भाँति-भाँति के नाम।। लिखा बहुत है खास पर,...
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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक” के गीत

।। कुछ कीट निकम्मे।। प्रथम-दूसरे और तीसरे, चौथे और पाँचवे खम्बे। सबको कुतर रहे भीतर घुस, घुन बनकर...