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डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक” के गीत
।। कुछ कीट निकम्मे।।
प्रथम-दूसरे और तीसरे,
चौथे और पाँचवे खम्बे।
सबको कुतर रहे भीतर घुस,
घुन बनकर...
समाचार के बाजे बजते
ढोल पीट कर
पोत लीप कर
समाचार के बाजे बजते
सच के कोई मूल्य न बचते
बिके मीडिया के महामहिम
टीवी पर...

