9:34 am - Saturday May 19, 2012

Tag Archives: poem

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इंसानी फितरत

जब जब अकेली होती हूँ जी भर कर रोती हूँ , कैसे बताऊ मन की व्यथा ? रोज़ टूटती हूँ फिर उठ खुद को जोडती...
79. Pisha looking at sunset

आखिरी मुलाकात…

ना जानें कौन सी मुलाकात आखिरी हो; वो शब्द आखिरी हो, संवाद आखिरी हो अरमां जो पुरे ना हो सके कभी बेतुकी...
andhi

कविता:सजा

कविता : कल रात एक झटके में तिनका तिनका बिखर गया आंधी आई और सब गुजर गया तूफ़ान उसके देस में चला आशियाँ...
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मानव मेहता की दो कविताएँ

तेरी महक (सबा) कुछ लफ्ज़ अपनी मोहब्बत के- बिखेर दो मेरे आँगन…. इन हवाओं में घोल दो- अपनी चाहत...
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अलका सैनी झार की कविता:खंडहर

खंडहर (एक) खंडहर हुआ महल अपने बोझिल अक्स को मूक आँखों से रहा निहार , जहाँ थी कभी यौवन भरे उपवन की...
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रियो-कुछ शब्द चित्र

१ सागर के तट पर, अठखेलियाँ करता यौवन बड़े बड़े दरवाजे, छोटी सी चिलमन २ बूढ़े के आस पास, दो दो हसीनायें और...
khana

मदन मोहन बाहेती’घोटू’ की दो कविताएँ

रसोई घर-सबसे बड़ी पाठशाला ———————————— रसोईघर, सबसे बड़ी पाठशाला है जहाँ,हर...
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सन्देश प्रकृति का

कविता तुम्हारी जिज्ञासा और मेरा कौतूहल एक दिन पहुँचे क्षितिज के पास, अठखेलियाँ करती परियाँ...
intjaar..

अँधेरे का आनंद क्या हैं दोस्तों ?

क्यूँ खुलती नहीं है उनकी आँखे क्यूँ नींद में हैं या क्यूँ मूह फेर कर बैठे हैं शतुरमुर्ग की तरह क्यूँ...
aakhon ke...

प्रणव प्रियदर्शी की कविता:आखों के उजियारे में…

मेरी आँखें खुलती हैं तब जब समाप्त हो चका होता है दिन का उत्सव मैं सोता हूँ उस वक्त जब खो चुका होता...