9:51 am - Saturday May 19, 2012

Tag Archives: vyangya

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राज कुमार साहू का व्यंग्य :सरकारी नौकरी की सोच

अभी हाल ही में मेरा एक मित्र मिल गया। उनसे काफी अरसे से भेंट नहीं हो पाई थी। जब उनका हालचाल पूछा...
महंगाई-डायन

राज कुमार साहू का व्यंग्य : महंगाई की चिता

हम अधिकतर कहते-सुनते रहते हैं कि चिंता व चिता में महज एक बिंदु का फर्क है। देश की करोड़ों गरीब...
janatantra

मदन मोहन बाहेती ‘घोटू’ की दो व्यंग्य कविताएँ

एक थैली के चट्टे बट्टे ————————— बी जे पी हो या कांग्रेस ये सब के सब है एक जैसे सब...
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एक गर्दन की दास्ताँ…

आज हाजिर हूँ आप सबके सामने… रविवार का दिन है.. फुर्सत ही फुर्सत है… कुछ ही देर पहले सोकर उठा...
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मिलती है राजनीति में कुर्सी कभी-कभी

चौबे जी की चौपाल से आज चौबे जी बहुत गुस्से में हैं । संसद के मॉनसून सत्र में मंहगाई और भ्रष्टाचार...
स्रोत - गुगल इमेज

ओम जय भ्रष्‍टाचार हरे

व्यंग्य (“स्रोत – गुगल इमेज”) मैं भ्रष्‍टाचार महान। मुझे क्‍या कर पायेगा अन्‍ना हजारे परेशान।...
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कपाल-भाती या कमाल-भाती

व्‍यंग्‍य एक हैं अण्णा हजारे, भ्रष्‍टाचार के तालाब में खूब पत्‍थर मारे। उनसे उठी लहरें अभी शांत...
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दो सांप, एक आस्तीन का इंसान..

व्यंग्य नागपंचमी पर दो बूढ़े सांप मिले। थे कवि। आपस में भिड़े। एक ने कहा कौन है आजकल ज्यादा खतरनाक...
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सियासत में भाई साबः एक चिंतन…

व्यंग्य हमारे यहां राजनीति में लगभग सभी वरिष्ठ भाई साहब कहलाते हैं। विदेश में जाने क्या होता...
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लेखकीय कद बढ़ाने में किताबों का योगदान..

व्यंग्य अपनी ही लिखी किताबों के ऊपर खड़े होकर उनका कद ऊंचा हो गया। स्टूल की जरूरत ही नहीं पड़ी! कुछ...